शायरों की शायरी

खुदा ही खुदा
इधर खुदा है, उधर खुदा है,
जिधर देखो उधर खुदा है,
इधर-उधर बस खुदा ही खुदा है
जिधर नही खुदा है….उधर कल खुदेगा!)

प्यार इसे कहते हैं
जवानी को ज़िन्दगी की निखार कहते हैं,
पथ्जद को चमन का मज्धार कहते हैं,
अजीब चलन हैं दुनिया का यारो,
एक धोका हैं जिसे हम सब “प्यार” कहते हैं !)

पुरानी जींस

पुरानी  जींस  और  गुइतर  …… मोहल्ले  की  वो  छत  …. और  मेरे  यार

 वो  रातों  को  जागना  … सुबह  घर  जान  … कूद  के  दीवार

 वो  सिगारेती  पीना  … गली  में  जाके  .. वो  करना  दांतों  को

 घड़ी  घड़ी  साफ

पहुँचना  कॉलेज हमेशा लेट  ….वो  कहना  सिर  का  “गेट  आउट  फ्रॉम  the  क्लास !”

 वो बाहर  जाके  हमशा  कहना  …यहाँ  का  system  …ही  है  ख़राब

 वो  जाके  […]                                                  ~*~Ram~*~

बेनाम सा ये दर्द, ठहर क्यूं नही जाता

बेनाम सा ये दरद, ठहर क्यु नही जाता..

जो बीत गया हैं, वो गुजर क्यू नही जाता…

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सब कुछ तो हैं, क्या दुदाती हैं ये निगाहे

क्या बात हैं, में वक्त पे घर क्यु नही जाता..

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वो एक चेहरा तो नही सारे जहा में…

जो दूर हैं वो दिल से उतर क्यो नही जाता…

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देखता हू में अपनी ही उलझी हुई, राहों का तमाशा

जाते हैं सब जिधर, मैं उधर क्यो नही जाता।

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वो नाम ना कब से, ना चेहरा ना बदन हैं..

वो खवाब हैं तो बिखर क्यो नही जाता।….