||घोटालों का मेला||

*सोने के सितेरे ऊचे अम्बर
से तोड सके
नेता का सपूत अलबेला
हो तो ऐसे हो

धरती पे आरती उतरे
बुढे बरगद नीम पे चढे हुआ करेला
हो तो ऐसे हो
दो किलो खली से तनों तेल
जो निकाल सके
सता का किह्लेरी खाया - खेला
हो तो ऐसे हो

कल था करोर करोड़पति आज
हे अरबपति

घोटालों का रोज-रोज मेला
हो तो ऐसे हो

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