संता और बंता
December 30, 2007 — workwithseo
1.
संता (बंता से)- तुम कौन-कौन सी भाषाएं बोल और लिख सकते हो?
बंता (संता से)- मैं चार भाषाएं अच्छी तरह बोल और लिख सकता हूं।
संता- अच्छा कौन-कौन सी?
बंता- हिंदी, देवनागरी, हिंदुस्तानी और राष्ट्रभाषा।
2.
संता (बंता से)- यार आज पहली बार अलार्म घड़ी से मेरी आंख खुली।
बंता (संता से)- वह कैसे?
संता- मेरी बीवी ने उसे मेरे सिर पर फेंक मारा था।
3.
संता डाकू(बंता से)- ओह! या तो जान दो या रुपया जितना तुम्हारे पास है।
बंता (संता डाकू से)- नहीं जी, तुम मेरी जान ले लो, रुपया तो मैंने बुढ़ापे के लिए रख छोड़ा है।
4.
संता (बंता से)- तुम जानते ही हो कि मैं कितनी मेहनत करके नीचे से ऊपर आया हूं।
बंता (संता से)- क्यों नहीं, पहले तुम बूट पॉलिश किया करते थे और अब सिर पर तेल मालिश का काम करते हो।
5.
संता (बंता से)- यह दो हजार का चेक किसे भेज रहे हो?
बंता (संता से)- अपने छोटे भाई को।
संता- लेकिन चेक पर तुमने हस्ताक्षर तो किये ही नही।
बंता- मैं अपना नाम गुप्त रखना चाहता हूं।
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.
January 17, 2008 at 1:08 pm
बहुत सही लिखा है संजीत भाई, आम आदिवासी दो पाटन के बीच पिस रहा है, और छत्तीसगढ जो कि वन सम्पदा और खनिजों से लबालब है आज चन्द लुटेरों के कब्जे में आ गया है, राजनैतिक पार्टियों से अब कोई उम्मीद नहीं बची इसलिये जनता को ही जागना होगा, चूँकि मेरा बचपन भी छत्तीसगढ में ही बीता है इसलिये दुख और अधिक होता है…लेकिन आप जैसे लोगों के रहते कुछ उम्मीद भी जागी रहती है…
January 17, 2008 at 1:10 pm
आप सचमुच बेहद संजीदा लेखक हैं। यह हमारा सांझा दर्द है। आभार आवाज बुलंद करने के लिये। मैं आपके साथ हूँ।
*** राजीव रंजन प्रसाद